The Essence of the Tantra· 9.32 / 53

The Essence of the Tantra9.32

9.32

पाशवविद्याक्रमेण अभ्यस्तपार्थिवयोगः कल्पान्ते मरणे वा धराप्रलयकेवलः

Transliteration (IAST)

pāśavavidyākrameṇa abhyastapārthivayogaḥ kalpānte maraṇe vā dharāpralayakevalaḥ

— पाशव-विद्या के क्रम से ; — पार्थिव योग का अभ्यास किये हुए ; — कल्प के अन्त में अथवा मरण में ; — धरा-प्रलयकेवल (धरा का प्रलयाकल)

जो पाशव-विद्या के क्रम से पार्थिव योग का अभ्यास किये हुए है, वह कल्प के अन्त में अथवा मरण में धरा-प्रलयकेवल (होता है)।