The Essence of the Tantra· 9.3 / 53

The Essence of the Tantra9.3

9.3

एषां सप्तैव शक्तयः तद्भेदात् पृथिव्यादिप्रधानतत्त्वान्तं चतुर्दशभिर् भेदैः प्रत्येकं स्वं रूपं पञ्चदशम्

Transliteration (IAST)

eṣāṃ saptaiva śaktayaḥ tadbhedāt pṛthivyādipradhānatattvāntaṃ caturdaśabhir bhedaiḥ pratyekaṃ svaṃ rūpaṃ pañcadaśam

— इन (सात प्रमाताओं) की ; — सात ही ; — शक्तियाँ ; — उनके भेद से ; — पृथिवी से प्रधान (प्रकृति) तत्त्व-पर्यन्त ; — चौदह ; — भेदों से ; — प्रत्येक ; — अपना (निज) रूप ; — पन्द्रहवाँ

इनकी सात ही शक्तियाँ हैं; और उनके भेद से पृथिवी से लेकर प्रधान (प्रकृति) तत्त्व-पर्यन्त चौदह भेदों से, प्रत्येक का अपना रूप पन्द्रहवाँ (होता है)।