The Essence of the Tantra· 8.92 / 93

The Essence of the Tantra8.92

8.92

अस्मिंश् च तत्त्वकलापे ऊर्ध्वोर्ध्वगुणं व्यापकं निकृष्टगुणं तु व्याप्यम्

Transliteration (IAST)

asmiṃś ca tattvakalāpe ūrdhvordhvaguṇaṃ vyāpakaṃ nikṛṣṭaguṇaṃ tu vyāpyam

— इस तत्त्व-कलाप में (तत्त्व-समूह में) ; — ऊर्ध्व-ऊर्ध्व (उत्तरोत्तर अधिक) गुण वाला ; — व्यापक — व्यापने वाला ; — निकृष्ट (न्यून) गुण वाला ; — व्याप्य — व्याप्त किया जाने वाला

और इस तत्त्व-कलाप में जो ऊर्ध्व-ऊर्ध्व (उत्तरोत्तर अधिक) गुण वाला है वह व्यापक है, और जो निकृष्ट (न्यून) गुण वाला है वह व्याप्य है।