The Essence of the Tantra· 8.87 / 93

The Essence of the Tantra8.87

8.87

रूपं क्षुभितं तेजः पूर्वगुणौ तु पूर्ववत्

Transliteration (IAST)

rūpaṃ kṣubhitaṃ tejaḥ pūrvaguṇau tu pūrvavat

— क्षुब्ध रूप (रूप-तन्मात्र) ; — तेज (अग्नि-तत्त्व) ; — पूर्व के दो गुण (शब्द, स्पर्श) ; — पूर्ववत् (बने रहते हैं)

क्षुब्ध रूप तेज है, और पूर्व के दो गुण (शब्द-स्पर्श) पूर्ववत् (बने रहते हैं)।