The Essence of the Tantra· 8.85 / 93

The Essence of the Tantra8.85

8.85

तत्र शब्दतन्मात्रात् क्षुभितात् अवकाशदानव्यापारं नभः शब्दस्य वाच्याध्यासावकाशसहत्वात्

Transliteration (IAST)

tatra śabdatanmātrāt kṣubhitāt avakāśadānavyāpāraṃ nabhaḥ śabdasya vācyādhyāsāvakāśasahatvāt

— क्षुब्ध शब्द-तन्मात्र से ; — अवकाश-दान के व्यापार वाला ; — नभ (आकाश-तत्त्व) ; — शब्द के वाच्य-अध्यास के अवकाश से सहित होने के कारण

वहाँ क्षुब्ध शब्द-तन्मात्र से अवकाश-दान के व्यापार वाला नभ (आकाश उत्पन्न होता है), क्योंकि शब्द वाच्य के अध्यास के अवकाश से सहित है।