The Essence of the Tantra· 8.28 / 93

The Essence of the Tantra8.28

8.28

यत् सङ्कल्पे भाति तत् पृथग्भूतं बहिर् अपि अस्ति स्फुटेन वपुषा घट इव

Transliteration (IAST)

yat saṅkalpe bhāti tat pṛthagbhūtaṃ bahir api asti sphuṭena vapuṣā ghaṭa iva

— संकल्प में — मानसिक कल्पना में ; — भासता है, प्रकाशित होता है ; — पृथग्भूत — पृथक् रूप में ; — बाहर, बाह्य में ; — स्फुट वपु से — स्पष्ट रूप से ; — घट — घड़ा

जो संकल्प में भासता है, वह पृथग्भूत होकर बाहर भी स्फुट वपु (स्पष्ट रूप) से रहता है — जैसे घट।