The Essence of the Tantra· 8.27 / 93

The Essence of the Tantra8.27

8.27

अत्र च द्वैरूप्ये प्रमाणम् अपि आहुर् अभिनवगुप्तगुरवः

Transliteration (IAST)

atra ca dvairūpye pramāṇam api āhur abhinavaguptaguravaḥ

— इस द्वैरूप्य में (दो-रूपता के विषय में) ; — प्रमाण — वैध ज्ञान-साधन ; — कहते हैं, घोषित करते हैं ; — अभिनवगुप्त के गुरु

और इस द्वैरूप्य में अभिनवगुप्त के गुरु प्रमाण भी कहते हैं।