The Essence of the Tantra· 8.26 / 93

The Essence of the Tantra8.26

8.26

एवं कलादितत्त्वानां धरान्तानाम् अपि द्वैरूप्यं निरूप्यम्

Transliteration (IAST)

evaṃ kalāditattvānāṃ dharāntānām api dvairūpyaṃ nirūpyam

— कला आदि तत्त्वों की ; — धरा-पर्यन्त ; — द्वैरूप्य — दो-रूपता ; — निरूपणीय — निश्चय करने योग्य

इस प्रकार कला आदि से लेकर धरा-पर्यन्त तत्त्वों की भी द्वैरूप्यता (दो-रूपता) का निरूपण करना चाहिए।