The Essence of the Tantra· 8.29 / 93

The Essence of the Tantra8.29

8.29

तथा च मायाकलादिखपुष्पादेर् अपि एषैव वर्तनी इति केवलान्वयी हेतुः

Transliteration (IAST)

tathā ca māyākalādikhapuṣpāder api eṣaiva vartanī iti kevalānvayī hetuḥ

— माया, कला आदि की तथा आकाश-पुष्प आदि की ; — यही वर्तनी (प्रक्रिया/मार्ग) ; — केवलान्वयी हेतु — केवल भावात्मक (प्रति-दृष्टान्त-रहित) तर्क

और इस प्रकार माया, कला आदि की तथा आकाश-पुष्प आदि की भी यही वर्तनी (प्रक्रिया) है — इस प्रकार यह केवलान्वयी हेतु है।