The Essence of the Tantra· 8.11 / 93

The Essence of the Tantra8.11

8.11

तस्मात् सामग्रीवादो ऽपि विश्वशरीरस्य संवेदनस्यैव कर्तृतायाम् उपोद्बलकः

Transliteration (IAST)

tasmāt sāmagrīvādo 'pi viśvaśarīrasya saṃvedanasyaiva kartṛtāyām upodbalakaḥ

— सामग्री-वाद (कारण-समूह का सिद्धान्त) ; — विश्व-शरीर वाले (संवेदन का) ; — संवेदन का ; — कर्तृत्व के प्रति ; — उपोद्बलक — समर्थक, पुष्टिकारी

अतः सामग्री-वाद भी विश्व-शरीर वाले संवेदन के ही कर्तृत्व का उपोद्बलक (समर्थक) है।