The Essence of the Tantra· 6.72 / 82

The Essence of the Tantra6.72

6.72

व्याने तु व्यापकत्वात् अक्रमे ऽपि सूक्ष्मोच्छलत्तायोगेन कालोदयः

Transliteration (IAST)

vyāne tu vyāpakatvāt akrame 'pi sūkṣmocchalattāyogena kālodayaḥ

— व्यान में (व्यापक वायु में) ; — व्यापकता के कारण ; — अक्रम (क्रम-रहित) होने पर भी ; — सूक्ष्म उच्छलत्ता (उछाल) के योग से ; — काल-उदय

किन्तु व्यान में व्यापकता के कारण अक्रम (क्रम-रहित) होने पर भी सूक्ष्म उच्छलत्ता (उछाल) के योग से काल-उदय (होता है)।