The Essence of the Tantra· 6.35 / 82

The Essence of the Tantra6.35

6.35

तत्र रुद्रस्य तदवसितौ शिवत्वगतिः रुद्रस्य उक्ताधिकारावधिः ब्रह्माण्डधारकाणां तत् दिनं शतरुद्राणां निशा तावती तेषाम् अपि च शतम् आयुः

Transliteration (IAST)

tatra rudrasya tadavasitau śivatvagatiḥ rudrasya uktādhikārāvadhiḥ brahmāṇḍadhārakāṇāṃ tat dinaṃ śatarudrāṇāṃ niśā tāvatī teṣām api ca śatam āyuḥ

— उसके समाप्त होने पर ; — शिवत्व की गति (प्राप्ति) ; — उक्त अधिकार की अवधि (रुद्र की) ; — ब्रह्माण्ड-धारकों की ; — शत-रुद्रों की (सौ रुद्रों की) ; — रात्रि ; — सौ (वर्ष) आयु

उसमें रुद्र के लिए उसके समाप्त होने पर शिवत्व की गति (प्राप्ति) होती है — यह रुद्र के उक्त अधिकार की अवधि है। वह ब्रह्माण्ड-धारक शत-रुद्रों का एक दिन है; उतनी ही उनकी रात्रि, और उनकी भी आयु सौ (वर्ष) है।