The Essence of the Tantra· 6.34 / 82

The Essence of the Tantra6.34

6.34

तत् दिनं तदूर्ध्वे रुद्रलोकप्रभो रुद्रस्य तावती रात्रिः प्राग्वत् वर्षं तच्छतम् अपि च अवधिः

Transliteration (IAST)

tat dinaṃ tadūrdhve rudralokaprabho rudrasya tāvatī rātriḥ prāgvat varṣaṃ tacchatam api ca avadhiḥ

— एक दिन ; — उससे ऊपर ; — रुद्रलोक के प्रभु का ; — रुद्र का ; — उतनी ही रात्रि ; — उसके सौ (वर्ष) ; — अवधि — जीवन की सीमा

वह उससे ऊपर रुद्रलोक के प्रभु, रुद्र का एक दिन है; उतनी ही रुद्र की रात्रि, पूर्ववत् वर्ष, और उसके भी सौ (वर्ष) अवधि है।