The Essence of the Tantra· 4.6 / 46

The Essence of the Tantra4.6

4.6

यथोक्तं पारमेश्वरे वैष्णवाद्याः समस्तास् ते विद्यारागेण रञ्जिताः

Transliteration (IAST)

yathoktaṃ pārameśvare vaiṣṇavādyāḥ samastās te vidyārāgeṇa rañjitāḥ

— जैसा कि कहा गया है ; — पारमेश्वर (शास्त्र) में ; — समस्त, सब ; — विद्या-राग से (सीमित ज्ञान और आसक्ति से) ; — रंजित — रँगे हुए, अनुरंजित

जैसा कि पारमेश्वर (शास्त्र) में कहा गया है — 'वे वैष्णव आदि समस्त विद्या-राग से रंजित (रँगे हुए) हैं,