स्ववासनाबलीयस्त्वात् भोगवासनाविच्छेदस्य च असम्भाव्यमानत्वात् बहुभिः दीक्षायाम् ऊर्ध्वशासनसंस्कारो बलवान् अन्यस् तु तत्संस्काराय स्यात्
Transliteration (IAST)
svavāsanābalīyastvāt bhogavāsanāvicchedasya ca asambhāvyamānatvāt bahubhiḥ dīkṣāyām ūrdhvaśāsanasaṃskāro balavān anyas tu tatsaṃskārāya syāt
अपनी वासना के बलीयस्त्व (अधिक प्रबलता) के कारण, तथा भोग-वासना के विच्छेद के असम्भाव्यमान (असम्भव-प्राय) होने के कारण, बहुतों की दीक्षा में ऊर्ध्व-शासन का संस्कार बलवान् (होता है); किन्तु अन्य (भोग-अंश) तो उसके संस्कार के लिए होता है।