The Essence of the Tantra· 14.27 / 29

The Essence of the Tantra14.27

14.27

भोगेच्छोः भोगस्थाने योजनिकार्थम् अपरा शुद्धतत्त्वसृष्ट्यर्थम् अन्या

Transliteration (IAST)

bhogecchoḥ bhogasthāne yojanikārtham aparā śuddhatattvasṛṣṭyartham anyā

— भोग-इच्छुक के ; — भोग-स्थान में ; — योजना (संयोजन) के लिए ; — एक (आहुति) ; — शुद्ध-तत्त्व-सृष्टि (नये देह की रचना) के लिए ; — अन्य

भोग-इच्छुक के लिए भोग-स्थान में योजना के लिए एक (आहुति), तथा शुद्ध-तत्त्व-सृष्टि (नये देह की रचना) के लिए अन्य।