The Essence of the Tantra· 14.18 / 29

The Essence of the Tantra14.18

14.18

निर्बीजायां तु समयपाशान् अपि शोधयेत् सा च आसन्नमरणस्य अत्यन्तमूर्खस्यापि कर्तव्या इति परमेश्वराज्ञा तस्यापि तु गुरुदेवताग्निभक्तिनिष्ठत्वमात्रात् सिद्धिः

Transliteration (IAST)

nirbījāyāṃ tu samayapāśān api śodhayet sā ca āsannamaraṇasya atyantamūrkhasyāpi kartavyā iti parameśvarājñā tasyāpi tu gurudevatāgnibhaktiniṣṭhatvamātrāt siddhiḥ

— निर्बीज (दीक्षा) में (कोई अवशेष न छोड़ने वाली) ; — किन्तु ; — समय-पाशों को भी (नियम-बन्धनों को भी) ; — शोधित करे ; — और वह (दीक्षा) ; — आसन्न-मरण (निकट-मृत्यु वाले) की ; — अत्यन्त मूर्ख की भी ; — कर्तव्य — करनी चाहिए ; — परमेश्वर की आज्ञा ; — उसके लिए भी ; — गुरु, देवता एवं अग्नि के प्रति भक्ति-निष्ठत्व-मात्र से ; — सिद्धि — प्राप्ति

किन्तु निर्बीज (दीक्षा) में समय-पाशों को भी शोधित करे; और वह (दीक्षा) आसन्न-मरण तथा अत्यन्त मूर्ख के लिए भी कर्तव्य है — ऐसी परमेश्वर की आज्ञा है। किन्तु उसके लिए भी गुरु, देवता एवं अग्नि के प्रति भक्ति-निष्ठत्व-मात्र से सिद्धि (होती है)।