अत्र च सर्वत्र वासनाग्रहणम् एव भेदकम् मन्त्राणां वासनानुगुण्येन तत्तत्कार्यकारित्वात्
Transliteration (IAST)
atra ca sarvatra vāsanāgrahaṇam eva bhedakam mantrāṇāṃ vāsanānuguṇyena tattatkāryakāritvāt
और यहाँ सर्वत्र वासना का ग्रहण ही भेदक (विभाजक) है, क्योंकि मन्त्र वासना के अनुगुण्य (अनुरूपता) से उस-उस कार्य को करते हैं।