The Essence of the Tantra· 14.19 / 29

The Essence of the Tantra14.19

14.19

अत्र च सर्वत्र वासनाग्रहणम् एव भेदकम् मन्त्राणां वासनानुगुण्येन तत्तत्कार्यकारित्वात्

Transliteration (IAST)

atra ca sarvatra vāsanāgrahaṇam eva bhedakam mantrāṇāṃ vāsanānuguṇyena tattatkāryakāritvāt

— यहाँ सर्वत्र ; — वासना का ग्रहण ही ; — भेदक — विभाजक तत्त्व ; — मन्त्रों का ; — वासना के अनुगुण्य (अनुरूपता) से ; — उस-उस कार्य को करने के कारण

और यहाँ सर्वत्र वासना का ग्रहण ही भेदक (विभाजक) है, क्योंकि मन्त्र वासना के अनुगुण्य (अनुरूपता) से उस-उस कार्य को करते हैं।