The Essence of the Tantra· 13.43 / 101

The Essence of the Tantra13.43

13.43

तत्र अधिवासनं शिष्यस्य संस्कृतयोग्यताधानम् अम्ब्लीकरणम् इव दन्तानां देवस्य कर्तव्योन्मुखत्वग्राहणम् गुरोस् तद्ग्रहणम्

Transliteration (IAST)

tatra adhivāsanaṃ śiṣyasya saṃskṛtayogyatādhānam amblīkaraṇam iva dantānāṃ devasya kartavyonmukhatvagrāhaṇam guros tadgrahaṇam

— अधिवासन — पूर्व-संस्कार ; — संस्कृत योग्यता का आधान (परिमार्जित पात्रता का स्थापन) ; — दाँतों के अम्लीकरण (खट्टे से किलकिलाने) के समान ; — देव का कर्तव्य-उन्मुखता का ग्रहण ; — गुरु का उसका ग्रहण

वहाँ अधिवासन शिष्य में संस्कृत योग्यता का आधान है — जैसे दाँतों का अम्लीकरण (खट्टे से किलकिलाना); यह देव का कर्तव्य-उन्मुखता का ग्रहण तथा गुरु का उसका ग्रहण है।