तत्रापि इच्छावैचित्र्यात् तिरोभूतो ऽपि स्वयं वा शक्तिपातेन युज्यते मृतो वा बन्धुगुर्वादिकृपामुखेन इत्य् एवं कृत्यभागित्वं स्वात्मनि अनुसन्दधत् परमेश्वर एव इति न खण्डितम् आत्मानं पश्येत्
Transliteration (IAST)
tatrāpi icchāvaicitryāt tirobhūto 'pi svayaṃ vā śaktipātena yujyate mṛto vā bandhugurvādikṛpāmukhena ity evaṃ kṛtyabhāgitvaṃ svātmani anusandadhat parameśvara eva iti na khaṇḍitam ātmānaṃ paśyet
वहाँ भी इच्छा-वैचित्र्य से तिरोभूत हुआ भी स्वयं अथवा शक्तिपात से युक्त होता है, अथवा मृत होने पर बन्धु, गुरु आदि की कृपा के मुख से। इस प्रकार अपने आत्मा में कृत्य-भागित्व का अनुसन्धान करता हुआ परमेश्वर ही (है) — इस प्रकार खण्डित आत्मा को न देखे।