The Essence of the Tantra· 11.19 / 25

The Essence of the Tantra11.19

11.19

स च दैशिको गुरुः आचार्यो दीक्षकः चुम्बकः स चायं पूर्णज्ञान एव सर्वोत्तमः तेन विना दीक्षाद्यसम्पत्तेः

Transliteration (IAST)

sa ca daiśiko guruḥ ācāryo dīkṣakaḥ cumbakaḥ sa cāyaṃ pūrṇajñāna eva sarvottamaḥ tena vinā dīkṣādyasampatteḥ

— दैशिक — मार्गदर्शक ; — गुरु ; — आचार्य ; — दीक्षक — दीक्षा देने वाला ; — चुम्बक (आकर्षक, 'चुम्बक') ; — पूर्ण-ज्ञान वाला ; — सर्वोत्तम ; — दीक्षा आदि की असम्पत्ति (असम्भवता) के कारण

और वह दैशिक, गुरु, आचार्य, दीक्षक, चुम्बक है; और यह पूर्ण-ज्ञान वाला ही सर्वोत्तम है, क्योंकि उसके बिना दीक्षा आदि की असम्पत्ति (असम्भवता) है।