The Essence of the Tantra· 10.2 / 18

The Essence of the Tantra10.2

10.2

कलाद्यध्वा तु निरूप्यते तत्र यथा भुवनेषु अनुगामि किञ्चिद् रूपं तत्त्वम् इत्य् उक्तम् तथा तत्त्वेषु वर्गशो यत् अनुगामि रूपं तत् कला एकरूपकलनासहिष्णुत्वात्

Transliteration (IAST)

kalādyadhvā tu nirūpyate tatra yathā bhuvaneṣu anugāmi kiñcid rūpaṃ tattvam ity uktam tathā tattveṣu vargaśo yat anugāmi rūpaṃ tat kalā ekarūpakalanāsahiṣṇutvāt

— कला आदि अध्वा — कला (खण्ड) का मार्ग ; — निरूपित किया जाता है ; — भुवनों में ; — अनुगामी — अनुस्यूत, अन्तर्व्याप्त रूप ; — रूप (को) तत्त्व (कहते हैं) ; — तत्त्वों में ; — वर्गशः — वर्ग-वार ; — कला — खण्ड ; — एक-रूप-कलना (एकत्व में ग्रहण) को सहन करने के कारण

अब कला आदि अध्वा का निरूपण किया जाता है। जैसे भुवनों में जो कोई अनुगामी रूप तत्त्व कहा गया, वैसे ही तत्त्वों में वर्गशः (वर्ग-वार) जो अनुगामी रूप है, वह कला है, क्योंकि वह एक-रूप-कलना (एकत्व में ग्रहण) को सहन करने में सक्षम है।