The Vision of Śiva· 7.80 / 122

The Vision of Śiva7.80

7.80
यस्यां यस्यां प्रतीतौ तु शिवोऽस्मीति मनोगमः । तस्यां तथैव चिन्तायां तद्ध्यानमपि जल्पितम् ॥८०॥
yasyāṃ yasyāṃ pratītau tu śivo'smīti manogamaḥ | tasyāṃ tathaiva cintāyāṃ taddhyānamapi jalpitam
— जिस-जिस प्रतीति में ; — निश्चय ही ; — 'मैं शिव हूँ' ; — यह ; — मनोगम (मन का भाव) ; — उस (प्रतीति) में ; — उसी प्रकार के चिन्तन में ; — वह भी ध्यान ; — कहा गया है

जिस-जिस प्रतीति (अनुभूति) में 'मैं शिव हूँ' यह मनोगम (मन का अभिगमन/भाव) होता है, उस (प्रतीति) में, उसी प्रकार के चिन्तन में, वह भी ध्यान कहा गया है।