यस्यां यस्यां प्रतीतौ तु शिवोऽस्मीति मनोगमः ।
तस्यां तथैव चिन्तायां तद्ध्यानमपि जल्पितम् ॥८०॥
yasyāṃ yasyāṃ pratītau tu śivo'smīti manogamaḥ |
tasyāṃ tathaiva cintāyāṃ taddhyānamapi jalpitam
जिस-जिस प्रतीति (अनुभूति) में 'मैं शिव हूँ' यह मनोगम (मन का अभिगमन/भाव) होता है, उस (प्रतीति) में, उसी प्रकार के चिन्तन में, वह भी ध्यान कहा गया है।