येन येनेन्द्रियेणार्थो गृह्यते तत्र तत्र सा ।
शिवता लक्षिता सत्या तद्ध्यानमपि वर्ण्यते ॥७९॥
yena yenendriyeṇārtho gṛhyate tatra tatra sā |
śivatā lakṣitā satyā taddhyānamapi varṇyate
जिस-जिस इन्द्रिय के द्वारा अर्थ (विषय) गृहीत किया जाता है, वहाँ-वहाँ वह सत्य (वास्तविक) शिवता लक्षित (देखी) जाती है; और वह भी ध्यान के रूप में वर्णित किया जाता है।