The Vision of Śiva· 7.79 / 122

The Vision of Śiva7.79

7.79
येन येनेन्द्रियेणार्थो गृह्यते तत्र तत्र सा । शिवता लक्षिता सत्या तद्ध्यानमपि वर्ण्यते ॥७९॥
yena yenendriyeṇārtho gṛhyate tatra tatra sā | śivatā lakṣitā satyā taddhyānamapi varṇyate
— जिस-जिस इन्द्रिय के द्वारा ; — अर्थ (विषय) ; — गृहीत किया जाता है ; — वहाँ-वहाँ ; — वह शिवता ; — लक्षित (देखी) जाती है ; — सत्य (वास्तविक) ; — वह भी ध्यान के रूप में ; — वर्णित किया जाता है

जिस-जिस इन्द्रिय के द्वारा अर्थ (विषय) गृहीत किया जाता है, वहाँ-वहाँ वह सत्य (वास्तविक) शिवता लक्षित (देखी) जाती है; और वह भी ध्यान के रूप में वर्णित किया जाता है।