The Vision of Śiva· 7.59 / 122

The Vision of Śiva7.59

7.59
संकल्पप्रभवं सर्वं जगदेतदनन्तकम् । सर्वं ममेति निर्व्यूढे स्यात्तदेकमयो भवः ॥५९॥
saṃkalpaprabhavaṃ sarvaṃ jagadetadanantakam | sarvaṃ mameti nirvyūḍhe syāttadekamayo bhavaḥ
— संकल्प से प्रभूत (उत्पन्न) ; — सब ; — यह जगत् ; — अनन्त ; — 'सब मेरा' ; — इस प्रकार ; — निर्व्यूढ (पूर्णतः सम्पादित) होने पर ; — होगा ; — उस एक से अनन्य भव (अस्तित्व)

यह समस्त अनन्त जगत् (शिव के) संकल्प से प्रभूत (उत्पन्न) है; 'यह सब मेरा है' इस (अनुभूति) के निर्व्यूढ (पूर्णतः सम्पादित) हो जाने पर उस एक (शिव) से अनन्य रूप वाला भव (अस्तित्व) हो जाएगा।