संकल्पप्रभवं सर्वं जगदेतदनन्तकम् ।
सर्वं ममेति निर्व्यूढे स्यात्तदेकमयो भवः ॥५९॥
saṃkalpaprabhavaṃ sarvaṃ jagadetadanantakam |
sarvaṃ mameti nirvyūḍhe syāttadekamayo bhavaḥ
यह समस्त अनन्त जगत् (शिव के) संकल्प से प्रभूत (उत्पन्न) है; 'यह सब मेरा है' इस (अनुभूति) के निर्व्यूढ (पूर्णतः सम्पादित) हो जाने पर उस एक (शिव) से अनन्य रूप वाला भव (अस्तित्व) हो जाएगा।