The Vision of Śiva· 7.49 / 122

The Vision of Śiva7.49

7.49
स्थैर्येणाभावभावानामात्मानं निर्मिणोति सः । स्वशरीरे दृढा शक्तिः प्राप्ताक्ष्यादिविधेयताम् ॥४९॥
sthairyeṇābhāvabhāvānāmātmānaṃ nirmiṇoti saḥ | svaśarīre dṛḍhā śaktiḥ prāptākṣyādividheyatām
— स्थैर्य के द्वारा ; — अभावों तथा भावों का ; — आत्मा (स्वरूप) ; — निर्माण करता है ; — वह ; — अपने शरीर में ; — दृढ़ शक्ति ; — नेत्र आदि की विधेयता (आज्ञाकारिता) को प्राप्त

स्थैर्य (दृढ़ता) के द्वारा वह अभावों तथा भावों दोनों के आत्मा (स्वरूप) का निर्माण करता है; उसके अपने शरीर में दृढ़ हुई शक्ति नेत्र आदि की विधेयता (आज्ञाकारिता) को प्राप्त कर लेती है।