The Vision of Śiva· 5.71 / 110

The Vision of Śiva5.71

5.71
अतो नास्त्यनुमानस्य दूषणाद्यैः प्रभाषितैः । तेन पूर्वोक्तया नीत्या भावानां स्वग्रहः स्थितः ॥७१॥
ato nāstyanumānasya dūṣaṇādyaiḥ prabhāṣitaiḥ | tena pūrvoktayā nītyā bhāvānāṃ svagrahaḥ sthitaḥ
— इसलिए ; — नहीं है ; — अनुमान का ; — दूषण आदि से ; — कहे गए ; — उससे ; — पूर्वोक्त नीति से ; — भावों का ; — स्व-ग्रह (अपने को जानना) ; — स्थित

इसलिए कहे गए दूषण आदि से अनुमान का (कोई स्वतन्त्र स्थान) नहीं; और उससे, पूर्वोक्त नीति (सिद्धान्त) से, भावों का स्व-ग्रह (प्रत्येक वस्तु का अपने को जानना) स्थित (सिद्ध) है।