अतो नास्त्यनुमानस्य दूषणाद्यैः प्रभाषितैः ।
तेन पूर्वोक्तया नीत्या भावानां स्वग्रहः स्थितः ॥७१॥
ato nāstyanumānasya dūṣaṇādyaiḥ prabhāṣitaiḥ |
tena pūrvoktayā nītyā bhāvānāṃ svagrahaḥ sthitaḥ
इसलिए कहे गए दूषण आदि से अनुमान का (कोई स्वतन्त्र स्थान) नहीं; और उससे, पूर्वोक्त नीति (सिद्धान्त) से, भावों का स्व-ग्रह (प्रत्येक वस्तु का अपने को जानना) स्थित (सिद्ध) है।