The Vision of Śiva· 5.72 / 110

The Vision of Śiva5.72

5.72
नाप्याप्तवचनग्राह्यः सामान्याद्वा विशेषतः । सामान्यादनुमानोक्तदूषणं तद्विशेषतः ॥७२॥
nāpyāptavacanagrāhyaḥ sāmānyādvā viśeṣataḥ | sāmānyādanumānoktadūṣaṇaṃ tadviśeṣataḥ
— और न ही ; — आप्त-वचन से ग्राह्य ; — सामान्य से अथवा ; — विशेष से ; — सामान्य से ; — अनुमान में कहा दूषण ; — वह ; — विशेष से

और न ही (वस्तु) आप्त-वचन (विश्वसनीय वचन) से ग्राह्य है — चाहे सामान्य से, चाहे विशेष से: सामान्य से तो अनुमान में कहा गया दूषण (लागू होता) है; विशेष से (— अगली कारिका में दोष देखो)।