The Vision of Śiva· 4.8 / 124

The Vision of Śiva4.8

4.8
विद्यते तत्तदत्रापि शिवत्वं केन वार्यते । इति चेदेषु सत्यत्वं स्थितमेव चिदुद्गमात् ॥८॥
vidyate tattadatrāpi śivatvaṃ kena vāryate | iti cedeṣu satyatvaṃ sthitameva cidudgamāt
— विद्यमान है ; — इस-उस में ; — यहाँ भी ; — शिवत्व ; — किससे ; — निवारित होता ; — यदि ऐसा कहो ; — इन (वस्तुओं) में ; — सत्यता ; — स्थित ही ; — चित् के उद्गम के कारण

(आक्षेप:) '(ऐसी सत्ता) इस-उस में विद्यमान है; यहाँ भी शिवत्व किससे निवारित होगा?' (उत्तर:) इन (मिथ्या-विकल्पित वस्तुओं) में भी सत्यता स्थित ही है — चित् के उद्गम के कारण।