स एव बुद्धरूपत्वे तथा भवति तत्क्षणम् ।
स एव संप्रजायेत तदनुष्ठानतत्परः ॥७५॥
sa eva buddharūpatve tathā bhavati tatkṣaṇam |
sa eva saṃprajāyeta tadanuṣṭhānatatparaḥ
वही बुद्ध (जागृत) रूप में उसी क्षण वैसा (जागृत) हो जाता है; और वही उस (साधना के) अनुष्ठान में तत्पर (साधक) रूप में उत्पन्न होता है।