The Vision of Śiva· 3.75 / 99

The Vision of Śiva3.75

3.75
स एव बुद्धरूपत्वे तथा भवति तत्क्षणम् । स एव संप्रजायेत तदनुष्ठानतत्परः ॥७५॥
sa eva buddharūpatve tathā bhavati tatkṣaṇam | sa eva saṃprajāyeta tadanuṣṭhānatatparaḥ
— वही ; — बुद्ध (जागृत) रूप में ; — वैसा ; — हो जाता है ; — उसी क्षण ; — वही ; — उत्पन्न होता है ; — उस (साधना के) अनुष्ठान में तत्पर

वही बुद्ध (जागृत) रूप में उसी क्षण वैसा (जागृत) हो जाता है; और वही उस (साधना के) अनुष्ठान में तत्पर (साधक) रूप में उत्पन्न होता है।