नानावादैर्नो विरोधः कथनीयमिहाग्रतः ।
उक्तं वा कालपादादावागोपालाङ्गनादिना ॥६३॥
nānāvādairno virodhaḥ kathanīyamihāgrataḥ |
uktaṃ vā kālapādādāvāgopālāṅganādinā
नाना वादों के साथ हमारा विरोध नहीं — यह यहाँ आगे कहने योग्य है; अथवा कालपाद आदि में 'गोपाल और स्त्रियों तक' इत्यादि (वचनों) से (यही) कहा गया है।