The Vision of Śiva· 3.63 / 99

The Vision of Śiva3.63

3.63
नानावादैर्नो विरोधः कथनीयमिहाग्रतः । उक्तं वा कालपादादावागोपालाङ्गनादिना ॥६३॥
nānāvādairno virodhaḥ kathanīyamihāgrataḥ | uktaṃ vā kālapādādāvāgopālāṅganādinā
— नाना वादों के साथ ; — नहीं ; — विरोध ; — कहने योग्य ; — यहाँ ; — आगे ; — कहा गया ; — अथवा ; — कालपाद आदि में ; — 'गोपाल और स्त्रियों तक' इत्यादि से

नाना वादों के साथ हमारा विरोध नहीं — यह यहाँ आगे कहने योग्य है; अथवा कालपाद आदि में 'गोपाल और स्त्रियों तक' इत्यादि (वचनों) से (यही) कहा गया है।