The Vision of Śiva· 3.62 / 99

The Vision of Śiva3.62

3.62
जलाहरणशक्तश्च घटो यदि न भण्यते । घटः केवल एवात्र तदेवंविधमुच्यताम् ॥६२॥
jalāharaṇaśaktaśca ghaṭo yadi na bhaṇyate | ghaṭaḥ kevala evātra tadevaṃvidhamucyatām
— जल लाने में समर्थ ; — और ; — घट ; — यदि ; — नहीं ; — कहा जाता ; — 'घट' ; — केवल मात्र ; — यहाँ ; — तो ; — वैसा (शक्ति-सम्पन्न) ; — कह दो

और यदि जल लाने में समर्थ घट यहाँ केवल 'घट' (मात्र) नहीं कहा जाता — तो उसे वैसा (शक्ति-सम्पन्न) कह दो (वैसे ही प्रत्येक भाव शक्ति-युक्त शिव है)।