The Vision of Śiva· 3.64 / 99

The Vision of Śiva3.64

3.64
तदैक्यं खेटपालोऽपि प्राह या काचन स्थिता । शक्तिः पदार्थ जातस्य देवदेवस्य साखिला ॥६४॥
tadaikyaṃ kheṭapālo'pi prāha yā kācana sthitā | śaktiḥ padārtha jātasya devadevasya sākhilā
— उस एकत्व को ; — खेटपाल भी ; — कहते हैं ; — जो ; — कोई ; — स्थित ; — शक्ति ; — समस्त पदार्थ-समूह की ; — देवदेव की ; — वह ; — सारी (अखिल)

उस एकत्व को खेटपाल भी कहते हैं: जो कोई शक्ति समस्त पदार्थ-समूह में स्थित है, वह सारी (की सारी) देवदेव की (शक्ति) है।