एवं प्रवर्तने तस्य न निमित्तसमुद्गमः ॥५१॥
evaṃ pravartane tasya na nimittasamudgamaḥ
इस प्रकार उसके (सृष्टि के) प्रवर्तन में किसी (बाह्य) निमित्त का समुद्गम (उद्भव) नहीं होता।
इस प्रकार उसके (सृष्टि के) प्रवर्तन में किसी (बाह्य) निमित्त का समुद्गम (उद्भव) नहीं होता।