The Vision of Śiva· 2.12 / 90

The Vision of Śiva2.12

2.12
आदौ तावदिन्द्रियत्वे स्थिता वाक्कर्मसंज्ञिते ॥१२॥
ādau tāvadindriyatve sthitā vākkarmasaṃjñite
— आरम्भ में ; — सर्वप्रथम ; — इन्द्रियत्व में ; — स्थित ; — 'वाक्' नामक कर्मेन्द्रिय के रूप में

(किन्तु हमारा खण्डन:) सर्वप्रथम तो वह (पश्यन्ती शब्द-रूप में) इन्द्रियत्व में ही स्थित है — जिसे 'वाक्' नामक कर्मेन्द्रिय कहते हैं।