The Vision of Śiva· 2.13 / 90

The Vision of Śiva2.13

2.13
इन्द्रियत्वेऽपि सामान्ये पाण्यादेर्ब्रह्मता न किम् ॥१३॥
indriyatve'pi sāmānye pāṇyāderbrahmatā na kim
— इन्द्रियत्व (मानने) पर ; — भी ; — सामान्य रूप से ; — हाथ आदि की ; — ब्रह्मता ; — क्यों नहीं

और यदि सामान्य रूप से इन्द्रियत्व (को ब्रह्म मान लें), तो हाथ आदि (इन्द्रियों) की ब्रह्मता क्यों नहीं?