The Vision of Śiva· 2.14 / 90

The Vision of Śiva2.14

2.14
अन्तः क्रमो हृदादेश्चेत्प्राणादेः किं न सत्यता ॥१४॥
antaḥ kramo hṛdādeścetprāṇādeḥ kiṃ na satyatā
— आन्तरिक ; — क्रम ; — हृदय आदि का ; — यदि ; — प्राण आदि की ; — क्यों नहीं ; — सत्यता

यदि (पश्यन्ती का) आन्तरिक क्रम हृदय आदि का है, तो प्राण आदि की सत्यता क्यों नहीं?