The Vision of Śiva· 2.11 / 90

The Vision of Śiva2.11

2.11
अविभागा तु पश्यन्ती सर्वतः संहृतक्रमा । इत्यादिवाक्यरचनैस्तैरेवं प्रतिपादितम् ॥११॥
avibhāgā tu paśyantī sarvataḥ saṃhṛtakramā | ityādivākyaracanaistairevaṃ pratipāditam
— अविभागा (अविभक्त) ; — किन्तु ; — पश्यन्ती ; — सब ओर से ; — संहृत-क्रमा (क्रम-संहार वाली) ; — इत्यादि वाक्य-रचनाओं से ; — उनके द्वारा ; — इस प्रकार ; — प्रतिपादित

'किन्तु पश्यन्ती अविभागा है, सब ओर से संहृत-क्रम वाली है' — इत्यादि वाक्य-रचनाओं से उनके द्वारा इस प्रकार प्रतिपादित किया गया है।