The Vision of Śiva· 1.4 / 49

The Vision of Śiva1.4

1.4
सुसूक्ष्मशक्तित्रितयसामरस्येन वर्तते । चिद्रूपाह्लादपरमो निर्विभागः परस्तदा ॥४॥
susūkṣmaśaktitritayasāmarasyena vartate | cidrūpāhlādaparamo nirvibhāgaḥ parastadā
— अत्यन्त सूक्ष्म शक्ति-त्रय के सामरस्य से ; — वर्तमान रहता है, स्थित रहता है ; — चिद्रूप के आह्लाद में परम परायण ; — निर्विभाग, अविभक्त ; — परम (शिव) ; — तब

तब वह अत्यन्त सूक्ष्म शक्ति-त्रय के सामरस्य से वर्तमान रहता है — चिद्रूप के आह्लाद में परायण, निर्विभाग, परम (शिव)।