The Vision of Śiva· 1.31 / 49

The Vision of Śiva1.31

1.31
क्रियाशक्तिसमाभोगात्कदाचित्स्थूलवेदनात् । विद्यात्वविद्येशानत्वमन्त्रमन्त्रेश्वरात्मताम् ॥३१॥
kriyāśaktisamābhogātkadācitsthūlavedanāt | vidyātvavidyeśānatvamantramantreśvarātmatām
— क्रियाशक्ति के पूर्ण आभोग से ; — कभी ; — स्थूल वेदन से ; — विद्या, विद्येश्वरों, मन्त्र और मन्त्रेश्वर के स्वरूप को

क्रियाशक्ति के पूर्ण आभोग से, और कभी स्थूल वेदन से, (वह) विद्या, विद्येश्वरों, तथा मन्त्र और मन्त्रेश्वर के स्वरूप (को धारण करता है)।