कुत्सितेऽकुत्सितस्य स्यात्कथमुन्मुखतेति चेत् ॥११॥
kutsite'kutsitasya syātkathamunmukhateti cet
यदि यह आक्षेप हो कि 'जो अकुत्सित (निन्दा-रहित शिव) है, उसकी किसी कुत्सित (निन्दनीय) वस्तु में उन्मुखता कैसे हो सकती है?' —
यदि यह आक्षेप हो कि 'जो अकुत्सित (निन्दा-रहित शिव) है, उसकी किसी कुत्सित (निन्दनीय) वस्तु में उन्मुखता कैसे हो सकती है?' —