अनालोचनतो दृष्टे विसर्गप्रसरास्पदे ।
विसर्गोक्तिप्रसङ्गे च वाचने धावने तथा ॥१०॥
anālocanato dṛṣṭe visargaprasarāspade |
visargoktiprasaṅge ca vācane dhāvane tathā
— बिना आलोचन (विचार) के; — (किसी वस्तु के) दीखने पर; — विसर्ग के प्रसार के स्थान में; — विसर्ग-ध्वनि के उच्चारण के प्रसंग में; — और; — बोलने में; — दौड़ने में; — उसी प्रकार
— बिना आलोचन के किसी वस्तु के दीखने पर, विसर्ग के प्रसार के स्थान में, विसर्ग-ध्वनि के उच्चारण के प्रसंग में, तथा बोलने और दौड़ने में भी।