The Vision of Śiva· 1.10 / 49

The Vision of Śiva1.10

1.10
अनालोचनतो दृष्टे विसर्गप्रसरास्पदे । विसर्गोक्तिप्रसङ्गे च वाचने धावने तथा ॥१०॥
anālocanato dṛṣṭe visargaprasarāspade | visargoktiprasaṅge ca vācane dhāvane tathā
— बिना आलोचन (विचार) के ; — (किसी वस्तु के) दीखने पर ; — विसर्ग के प्रसार के स्थान में ; — विसर्ग-ध्वनि के उच्चारण के प्रसंग में ; — और ; — बोलने में ; — दौड़ने में ; — उसी प्रकार

— बिना आलोचन के किसी वस्तु के दीखने पर, विसर्ग के प्रसार के स्थान में, विसर्ग-ध्वनि के उच्चारण के प्रसंग में, तथा बोलने और दौड़ने में भी।