Verses on the Recognition of the Lord· 5.8 / 21

Verses on the Recognition of the Lord5.8

5.8
अनुमानम् अनाभातपूर्वे नैवेष्टम् इन्द्रियम् आभातम् एव बीजादेर् आभासाद् धेतुवस्तुनः ॥८॥
anumānam anābhātapūrve naiveṣṭam indriyam ābhātam eva bījāder ābhāsād dhetuvastunaḥ
— अनुमान ; — पूर्व में अप्रतिभासित (वस्तु) के विषय में ; — बिल्कुल नहीं ; — स्वीकृत (प्रमाण रूप में) ; — इन्द्रिय (जो अनुमित होती है) ; — केवल वही जो (पहले) प्रतिभासित हो चुका है ; — बीज आदि से ; — आभास से ; — कारण-वस्तु (अंकुर आदि) के

जो पूर्व में कभी प्रतिभासित नहीं हुआ, उसके विषय में अनुमान स्वीकार नहीं किया जाता; केवल वह इन्द्रिय, जो स्वयं (पहले) प्रतिभासित हो चुकी है, बीज आदि कारण-वस्तु के आभास से (अनुमित होती है)।