Verses on the Recognition of the Lord· 13.7 / 11

Verses on the Recognition of the Lord13.7

13.7
तस्यैश्वर्यस्वभावस्य पशुभावे प्रकाशिका विद्याशक्तिः तिरोधानकरी मायाभिधा पुनः ॥७॥
tasyaiśvaryasvabhāvasya paśubhāve prakāśikā vidyāśaktiḥ tirodhānakarī māyābhidhā punaḥ
— उस ; — ऐश्वर्य-स्वरूप (का) ; — पशु-भाव (बद्ध दशा) में ; — प्रकाशिका — प्रकट करने वाली ; — विद्या-शक्ति (है) ; — तिरोधान (आच्छादन) करने वाली ; — 'माया' नाम वाली ; — दूसरी ओर, फिर

पशु-भाव (बद्ध दशा) में उस ऐश्वर्य-स्वरूप को प्रकाशित करने वाली विद्या-शक्ति है; और जो (उसका) तिरोधान (आच्छादन) करती है, वह दूसरी ओर 'माया' नाम वाली है।