Verses on the Recognition of the Lord· 11.12 / 17

Verses on the Recognition of the Lord11.12

11.12
अर्थक्रियापि सहजा नार्थानाम् ईश्वरेच्छया नियता सा हि तेनास्या नाक्रियातो ऽन्यता भवेत् ॥१२॥
arthakriyāpi sahajā nārthānām īśvarecchayā niyatā sā hi tenāsyā nākriyāto 'nyatā bhavet
— अर्थक्रिया ; — भी ; — सहज, स्वाभाविक ; — नहीं ; — अर्थों की ; — ईश्वर की इच्छा से ; — नियत, निर्धारित (भूत कृदन्त) ; — वह (अर्थक्रिया) ; — निश्चय ही ; — उससे (इच्छा से), इसलिए ; — इस (अर्थक्रिया) की ; — नहीं ; — अक्रिया (ईश्वर की निष्क्रियता) से ; — अन्यता, भिन्नता ; — उत्पन्न हो (विधि, √भू)

अर्थक्रिया भी अर्थों में सहज (स्वाभाविक) नहीं है; वह ईश्वर की इच्छा से नियत है; क्योंकि उसी (इच्छा) से वह वैसी है; उसकी अन्यता (परिवर्तन) ईश्वर की किसी अक्रिया (निष्क्रियता) से उत्पन्न नहीं होगी।