सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् ।
कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् ॥
९-८ ॥
sarvabhūtāni kaunteya prakṛtiṃ yānti māmikām |
kalpakṣaye punastāni kalpādau visṛjāmyaham ||
9-8 ||
हे कुन्तीपुत्र, समस्त भूत कल्प के अन्त में मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं; और कल्प के आदि में मैं फिर उन्हें उत्पन्न करता हूँ।