Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.8 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.8

9.8
सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् । कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् ॥ ९-८ ॥
sarvabhūtāni kaunteya prakṛtiṃ yānti māmikām | kalpakṣaye punastāni kalpādau visṛjāmyaham || 9-8 ||
— समस्त भूत, हे कुन्तीपुत्र ; — मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं ; — कल्प के अन्त में; फिर उन्हें ; — कल्प के आदि में मैं उत्पन्न करता हूँ

हे कुन्तीपुत्र, समस्त भूत कल्प के अन्त में मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं; और कल्प के आदि में मैं फिर उन्हें उत्पन्न करता हूँ।