मया ततमिदं कृत्स्नं जगदव्यक्तमूर्तिना ।
मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाऽहं तेष्ववस्थितः ॥
९-४ ॥
mayā tatamidaṃ kṛtsnaṃ jagadavyaktamūrtinā |
matsthāni sarvabhūtāni na cā'haṃ teṣvavasthitaḥ ||
9-4 ||
मुझ अव्यक्त-मूर्ति के द्वारा यह समस्त जगत् व्याप्त है; समस्त भूत मुझमें स्थित हैं, किन्तु मैं उनमें स्थित नहीं हूँ।