Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.4 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.4

9.4
मया ततमिदं कृत्स्नं जगदव्यक्तमूर्तिना । मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाऽहं तेष्ववस्थितः ॥ ९-४ ॥
mayā tatamidaṃ kṛtsnaṃ jagadavyaktamūrtinā | matsthāni sarvabhūtāni na cā'haṃ teṣvavasthitaḥ || 9-4 ||
— मुझसे यह समस्त व्याप्त ; — जगत्, अव्यक्त-मूर्ति वाले मुझसे ; — समस्त भूत मुझमें स्थित ; — और मैं उनमें स्थित नहीं

मुझ अव्यक्त-मूर्ति के द्वारा यह समस्त जगत् व्याप्त है; समस्त भूत मुझमें स्थित हैं, किन्तु मैं उनमें स्थित नहीं हूँ।