Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.3 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.3

9.3
अश्रद्दधानाः पुरुषा धर्मस्यास्य परन्तप । अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ॥ ९-३ ॥
aśraddadhānāḥ puruṣā dharmasyāsya parantapa | aprāpya māṃ nivartante mṛtyusaṃsāravartmani || 9-3 ||
— श्रद्धा न रखने वाले पुरुष ; — इस धर्म में, हे परन्तप ; — मुझे न पाकर लौट आते हैं ; — मृत्यु-संसार के मार्ग में

हे परन्तप, इस धर्म में श्रद्धा न रखने वाले पुरुष मुझे न पाकर मृत्यु और संसार के मार्ग में लौट आते हैं।