Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.22 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.22

9.22
ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालं क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोकं विशन्ति । एवं त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना गतागतं कामकामा लभन्त ॥ ९-२२ ॥
te taṃ bhuktvā svargalokaṃ viśālaṃ kṣīṇe puṇye martyalokaṃ viśanti | evaṃ trayīdharmamanuprapannā gatāgataṃ kāmakāmā labhanta || 9-22 ||
— वे उस विशाल स्वर्गलोक को भोगकर ; — पुण्य क्षीण होने पर मर्त्यलोक में प्रवेश करते हैं ; — इस प्रकार तीनों वेदों के धर्म का अनुसरण करने वाले ; — कामनाओं की कामना करते हुए आना-जाना पाते हैं

वे उस विशाल स्वर्गलोक को भोगकर, पुण्य क्षीण होने पर मर्त्यलोक में प्रवेश करते हैं; इस प्रकार तीनों वेदों के धर्म का अनुसरण करने वाले, कामनाओं की कामना करने वाले लोग आना-जाना ही पाते हैं।