Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.23 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.23

9.23
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते । तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥ ९-२३ ॥
ananyāścintayanto māṃ ye janāḥ paryupāsate | teṣāṃ nityābhiyuktānāṃ yogakṣemaṃ vahāmyaham || 9-23 ||
— अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करते हुए ; — जो लोग उपासना करते हैं ; — उन नित्ययुक्तों का ; — योगक्षेम मैं वहन करता हूँ

जो लोग अनन्य भाव से मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, उन नित्ययुक्त लोगों का योगक्षेम मैं वहन करता हूँ।